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ठगो की करतूत -Akbar birbal stories in hindi

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ठगो की करतूत -Akbar birbal stories in hindi 


दिल्ली में एक ईमानदार साहूकार रहता था | एक बार दो ठग सेठ के भेष आए, उन्होंने अपने को चीन का    निवासी बताया और साहूकार से प्रार्थना की की हम लोगो  के पास कुछ जेवरात है| आप इन्हे  बिकवा दे तो बड़ी कृपा होगी | साहूकार ईमानदार था | छल कपट की बातें उसे पता न चली | उसने  स्वाभाविक सरलता से कहा की जबतक में किसी को दिखाकर बातचीत न करूंगा, तब तक इनका बिकना संभव न होगा |


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आप लोग इन जेवरातों को मेरे पास रहने दीजिये  दोपहर तक इनका इंतज़ाम हो जायेगा | सेठ के रूप में जो ठग थे उन्होंने कहा- आप बे खटक जेवरों को अपने पास रखिये | पर ध्यान रहे की जब हम दोनों ही आपके पास जेवर लेने आये तो ही जेवर हमें दीजियेगा | अगर कोई एक आये तो नहीं | साहूकार ने कहा की ऐसा ही होगा सब जेवरातों को देकर ठग चले गए | 60-70 गज का फैसला तय ाकरने के बाद उनमे से एक ने वापस आकर साहूकार से कहा- की आप जेवरातों को दे दो |

ठगो की करतूत -Akbar birbal stories in hindi 


हम लोग कल दोपहर आप की सेवा ंविं हाज़िर हो जायेंगे | साहूकार ने पूछा की आपका दूसरा साथी कहाँ है | आने वाले ठग ने ऊँगली के इसारे से साहूकार को बतलाया की | उस चौराहे  के पास  मेरा दूसरा साथी वार्तालाप कर रहा है | उसके आदेश से में आया हु साहूकार ने भी देखा तो साहूकार को विश्वास हो गया | और जेवरात वापस कर दिए |


कुछ देर बाद जब दूसरा साथी आया तो वह जेवर मांगने लगा | तो साहूकार ने कहा - की जब आप चौराहे के पास खड़े होकर वार्तालाप कर रहे थे | तब आपका दूसरा साथी आया और जेवरातों को ले गया | मैंने उससे पूछा की आपका दूसरा साथी कहा है | तो वह बोला की देखो वह वही तो खड़े बात कर रहे है | उन्ही के कहने से तो में यहाँ आया हूँ | तो मैंने जेवर उसे दे दिए | ठग ने जेवर वापस लिए बिना वाहन से न हटने का निश्चय किया | और बोलै की जब मैंने आपको पहले ही सावधान कर दिया था की  की हम दोनों आये तो ही जेवर देना | तो आपने उस अकेले तो जेवर क्यों दिए | जब तक में न आता तबतक आपको जेवर देने उचित न थे | इसका दंड में क्यों भोगुं  आपने जैसा किया आप वैसा भरिये |


साहूकार ने  नम्रतापूर्वक उत्तर दिया - आप  वक़्त चौराहे के पास बात कर रहे थे | तब  साथी जेवर लेने आया था | ठग का मिजाज गरम हो गया -गुस्से में आकर बोलै की इससे क्या होता है में कही  खड़ा भी नहीं हो सकता | मैंने तो उसे आभूषणो के लिए  था |


वाद विवाद बढ़ता ही गया | ठग किसी तरह से मानने को तैयार न था | जब उसको जेवर वापस मिलने की उम्मीद ही न रही तो वह धमकी देता हुआ वह से उठ खड़ा हुआ और जाते जाते यह भी कहता गया की तुम्हे बदनाम करके ही छोडूंगा सेठ जी |

ठगो की करतूत -Akbar birbal stories in hindi 

साहूकार ने कहा जब तुम्हारी मंसा यही है  तो फिर कोई बात ही नहीं |  जो जी में  आये सो करना मैंने उधर तो खाया है नहीं | ठग ने शीघ्र ही बादशाह के यहाँ दरखास दे दी | बादशाह ने इसका भार बीरबल को सौंपा | बीरबल ने आज्ञा का पालन करते हुए साहूकार को बुलवाया | साहूकार आया और कथा सुनाई और बड़े बड़े महाजनो की गवाही भी दिलवाई  | बीरबल को तब विश्वास हो गया की ठग का यह वादा  झूठा है |


यह होते हुए भी बिना  सबूत के दण्डित करना अपमान जनक है | यह ख्याल कर बीरबल ठग से बोले की जब तुमने यह कहा की हम दोनों साथ ही आवे  देना तो तो तुम अकेले ही क्यों आये | तुम्हारा दूसरा साथी कहाँ है | अब तो  जवाब न बना | तो बीरबल ने साहूकार को आज्ञा दी की तुम जाओ | अब जब भी कभी दोनों साथ आये तो हमारे पास लाना अगर अकेले आये तो भी साथ लाना |


ठग ने समझ लिए की अब कोई बस न चलेगा, लचर होकर ठग वापस चला गया | और फिर कभी साहूकार के पास वापस न आया | साहूकार इस न्याय से खुश हुआ| बादशाह ने भी मन ही  मन बीरबल की प्रसंसा की |

यह थी कहानी जिसका नाम था ठगो की करतूत | ऐसे ही और कहानिया पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें | जिससे की आप किसी भी पोस्ट को मिस न करें |

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