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यहाँ,वहां -दोनों जगह -AKBAR BIRBAL STORIES IN HINDI

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यहाँ,वहां -दोनों जगह -AKBAR BIRBAL STORIES IN HINDI 



एक दिन बादशाह ने -
1 जो यहाँ हो,वहां नहीं |
2 जो वहां तो हो,यहाँ नहीं |
3जो यहाँ भी नहीं,वहां भी नहीं |
4 जो यहाँ और वहां दोनों जगह हो |

इन चारो के बारे में स्पष्ट करने को कहा |

जब  अन्य लोग उसकी गूढ़ता समझ न सके तो बीरबल ने दो दिन की  मोहलत मांगते हुए कहा-जहाँ पनाह में दो दिनों में इन चारो चीज़ो को आपके सामने हाज़िर कर दूंगा |

akbar birbal stories in hindi


दो दिनों को बाद बीरबल ने एक ऐसा वैश्या, एक साधु, एक भिकारी और एक दानवीर सेठ को बादशाह के समुख ला उपस्तिथ किया | बादशाह में भरे दरबार में रहस्य पूछा,तो बीरबल ने बताया-यह वैश्या  है | जो यहाँ तो सुखी और संपन्न है,सुख इसके कदमो में बिछा है | परन्तु यह पाप करती है अतः यह यहाँ तो है पर उसकी जगह स्वर्ग में नहीं होगी |

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इस तरह बीरबल ने पहले सवाल को हल कर दिया | दूसरे सवाल को हल करने के लिए उन्होंने साधु को आगे करते हुए कहा-यह साधु महाराज है जो तप और साधना करके कष्ट भोग रहे है | ये दुनिया में आकर यहाँ के सुखो से दूर रहने की चेष्टा कर रहे है | क्युकी इन्हे आशा है की अपने  इस लोक में कर्मो का फल परलोक में प्राप्त करेंगे | इस प्रकार जो शारीरिक कष्ट ये यहाँ भोग रहे है,इसके बाद वहां यानि की परलोक में नहीं भोगेंगे |

तीसरे प्रसन के उत्तर में भिकारी को आगे करते हुए बीरबल ने कहा -यह भिकारी अत्यंत दरिद्र जीवन व्यतीत करता हुआ यहाँ भी सिर्फ भिक्षा पर जीवन गुजार रहा है | ईश्वर भक्ति से दूर है | अतः यहाँ भी दुःख भोग रहा है,अच्छे कार्य करने के कारण वहां भी दुःख भोगेगा |

चौथे सवाल के जवाब में दानवीर सेठ को आगे करते हुए बीरबल ने कहा-यह दानवीर सेठ है | इन्हे धन सम्पदा प्राकर्तिक रूप से मिली है,मगर उसका सही इस्तेमाल करके संसार में सारा सुख भोग रहे है,साथ ही गरीबों,विधवाओं ,दीनो ,अनाथो को दिल खोलकर दान देने के कारण ये न केवल मानव कल्याण कर रहे है , बल्कि परलोक में भी,यानि स्वर्ग में भी अपना स्थान बना रहे है|
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अतः ये यहाँ सुखी रहते हुए,वहां भी सुखी रहेंगे | बादशाह की चारो बातें पूरी हो गयीं थी | वह प्रसन्न हुए | उन्होंने वैश्या को वहां तक आने का मुआवज़ा,साधु को सम्मान ,भिकारी को दान और सेठ को उपाधि देकर वहां से बिदा किया |

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